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कुछ महिलाएँ

कुछ महिलाएँ होती है  आझाद उत्सव मनाती है अपने होने का  जिंदा करती है  अपनी बौद्धिकता से  मानवता को  और  देती है चुनौती सामाजिक बुद्धिहीनता को क्योंकि सामाजिक बुद्धिहीनता  बांधती है बांध  बुद्धि पर  और रोक देती है मानवता की उठती लहरों को ऐसी महिलाएँ  कभी  कही जाती हैं  परकटी, घर तोडनेवाली, निस्तेज और यौवनहीन........... डॉ. अस्मिता  

चुनाव

चुनाव हो अपनी मानसिकता के  समाज का या समाज हो अपनी मानसिकता का दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू है। सही चुनाव तो सही मानसिकता का है। जीसे हम बनाते हैं  क्योंकि.......  मानसिक सिंचाई की गुणवत्ता  ही  जीवित रखती है हमारी अस्मिता को........ डॉ. अस्मिता

सिमोन और सार्त्र

सिमोन की बौध्दिकता  उसकी अपनी थी।   सिमोन की सोच  उसकी अपनी थी।  सिमोन की क्रांतिकारीता  उसकी अपनी थी। जीवन की निर्णायकता भी  उसकी अपनी थी। लेकिन....... सिमोन को सार्त्र की साथ थी।  सार्त्र भी सिमोन जैसा ही साथी चाहता होगा। क्योंकि...... एक दार्शनिक व्यक्ति  एक दार्शनिक मानस चाहता है,  जो सिमोन के पास था। इसलिए........ सवाल सहअस्तित्व का है। सिमोन और सार्त्र एक दुसरे का सहअस्तित्व चाहते थे। और..... उस सहअस्तित्व की स्वीकार्यता भी थी।  लेकिन....... नासमझ लोगों ने  कभी सिमोन को सार्त्र  का स्पर्धक माना। तो...... कभी सार्त्र को सिमोन का........  कभी सिमोन को सार्त्र  से कम समझा। तो...... कभी सार्त्र को सिमोन से..... सवाल तो बस साथ होने का है। क्योंकि....... सार्त्र से ही सिमोन बनती है। और ..... सिमोन से ही सार्त्र बनता है। डॉ. अस्मिता 

शिक्षा व्यवस्था

शिक्षा व्यवस्था जिनका अपना भविष्य बना हुआ है। वे दुसरों का भविष्य बिगाडने में लगे हैं। और...... जिनका अपना भविष्य बिगडा हुआ है। वे दुसरों का भविष्य बनाने में लगे हैं।  वाह रे.....प्रभू...... तेरी लिला अपरंपार है।  डॉ. अस्मिता

मौन

मौन ज्ञान है। विमौन अज्ञान है। क्षमा स्थिरता है। क्रोध अस्थिरता है। शांति आत्मीय है। अशांति दुर्भावना है।  मौन शांति तक जाने की पहली सिडी है। क्योंकि…..... ईश्वर आत्मा की गहन शांति का नाम हैं। डॉ. अस्मिता

समय की रफ़्तार

हमे लगता हैं...............   हम तो अभी बच्चे हैं।    समय आपका बचपना कैसे  छिन लेता है।   पता ही नही चलता।  हमे लगता है.................  हम तो अभी जवान हो गए।  उसके यौवन उत्साह में बहने लगते हैं।  समय अपनी रफ़्तार तेज करके  हमे जिम्मेदारियों का एहसास कराता है।  फिर हम जिम्मेदारियों को निभाने में खुश होने लगते है।  हमें लगता है..........  हमने सब कुछ पा लिया है।   फिर समय अपनी रफ़्तार बढाता है।   और हमे कहता है..............  थोडी देर रुककर सोच ले।   तू क्या जी रहा है।   फिर इंसान सोचने लगता है।   और खुद को जिने लगता हैं।  फिर एक बार समय अपनी रफ़्तार तेज करता है।   और हमे  प्यार से बताता है कि.............  अब तुम्हारा समय ख़तम हुआ हैं।  हमे लगता है हमने जिया क्या? उत्तर आता है.............   तुमने जिम्मेदारियों को जिया।   तुमने रिश्ते नातों को जिया।   तुमने रितिरिवाज़ और परंपराओं को जिया। ...

प्रेम

प्रेम आझादी हैं।  प्रेम स्थिरता हैं।  प्रेम शांति हैं।  प्रेम आनंद हैं।  प्रेम विश्वास हैं ।  प्रेम ऊर्जा हैं ।  प्रेम उत्साह हैं।  प्रेम एहसास हैं ।  प्रेम परमात्मा हैं ।  बस सवाल तुम्हारी परिपक्वता का हैं....... - डॉ. अस्मिता