ज्ञान तुम हो विज्ञान तुम हो तुम्हारे ही भीतर है अनुभव और मनोरंजन का सहअस्तित्व तुम्हारे गर्भ से ही जन्म होता है मेरी बौद्धिकता का मेरी बौद्धिकता मेरा अस्तित्व है हे......किताब मेरे अस्तित्व के निर्माता तुम हो...... डॉ. अस्मिता
आप और हम आपका पढना परंपरा है। हमारा पढना परिवर्तन है। आपकी लढाई विमर्श है। हमारी लढाई संघर्ष है। आपका पहनावा अभिलाषा है। हमारा पहनावा अस्तित्व है। आपका लिखना लेखक बनना है। हमारा लिखना सेवक बनना है। आपकी कलम मनोरंजन करती है। हमारी कलम परिवर्तन करती है। आपका विश्वास नियमों पर है। हमारा विश्वास मुक्ती पर है। डॉ. अस्मिता
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