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समय की रफ़्तार

हमे लगता हैं...............  
हम तो अभी बच्चे हैं।  
 समय आपका बचपना कैसे  छिन लेता है।  
पता ही नही चलता। 
हमे लगता है................. 
हम तो अभी जवान हो गए। 
उसके यौवन उत्साह में बहने लगते हैं। 
समय अपनी रफ़्तार तेज करके 
हमे जिम्मेदारियों का एहसास कराता है। 
फिर हम जिम्मेदारियों को निभाने में खुश होने लगते है। 
हमें लगता है.......... 
हमने सब कुछ पा लिया है।  
फिर समय अपनी रफ़्तार बढाता है।  
और हमे कहता है..............
 थोडी देर रुककर सोच ले। 
 तू क्या जी रहा है।  
फिर इंसान सोचने लगता है। 
 और खुद को जिने लगता हैं। 
फिर एक बार समय अपनी रफ़्तार तेज करता है। 
 और हमे 
प्यार से बताता है कि............. 
अब तुम्हारा समय ख़तम हुआ हैं। 
हमे लगता है हमने जिया क्या?
उत्तर आता है.............  
तुमने जिम्मेदारियों को जिया।  
तुमने रिश्ते नातों को जिया।  
तुमने रितिरिवाज़ और परंपराओं को जिया।  
और यह सब तुमने 
अपनी आत्मा को 
ना जीने की 
शर्त पर किया..............  
# डॉ. अस्मिता #

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