कुछ महिलाएँ होती है आझाद
उत्सव मनाती है
अपने होने का
जिंदा करती है
अपनी बौद्धिकता से
मानवता को
और
देती है चुनौती
सामाजिक बुद्धिहीनता को
क्योंकि
सामाजिक बुद्धिहीनता
बांधती है बांध बुद्धि पर
और
रोक देती है
मानवता की उठती लहरों को
ऐसी महिलाएँ
कभी कही जाती हैं
परकटी, घर तोडनेवाली, निस्तेज और यौवनहीन...........
डॉ. अस्मिता
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