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Showing posts from May, 2024

स्त्री या मनुष्य

                                                    दुनिया तुम्हें कहेगी तुम स्त्री हो .........  तुम कहना मैं मनुष्य हूँ।  दुनिया तुम्हें कहेगी तुम देह हो........  तुम कहना मैं बुद्धि हूँ ।  दुनिया तुम्हें कहेगी तुम रिश्ता हो .......  तुम कहना मैं फरिश्ता हूँ ।  डॉ. अस्मिता 

पहचान

तुम जीवित होने तक दुनिया तुम्हें तुम्हारी  पहचान पुछेगी तुम्हारे पास ये है क्या? वो है क्या?  सभी सवाल 'है क्या' वाले होंगे....... तुम 'हो क्या'?  यह तुम्हें कोई नहीं पूछेगा  जब तुम मरोगे तो लोग कहेंगे  'इंसान अच्छा था'।   अर्थात............  तुम मरने के बाद  तुम्हें इंसान समझा जायेगा।   तब तक तुम्हारी किमत  तुम्हारे पास है क्या?  से नापी जायेगी............  इसलिए मरने से पहले  तुम अपनी किमत  निर्धारित करना  क्योंकी   तुम ही निर्धारक हो मनुष्यता के..... # डॉ. अस्मिता #

बगावत

जिस दिन  तुम्हें लगे  जीवन में कुछ खास नहीं बचा जीवन उदास लगे  जीवन का रस कम हो जाये ...... उसी दिन तुम  अपनी मन की आवाज सूनना  और अपनी पसंद का  जीवन जीने लगना  यही सही समय है । अपने आपको जीने का......  यही समय है।  अपने आप को मुक्ति  दिलाने का ..... बरसों  से जो तुमने  अपनी आत्मा को सुन्न करके रखा है  बरसों से जो तुमने  अपनी आवाज़ को दबाया है,। बरसों से जो तुमने  अपने शब्दों  को  नकली बनाकर रखा है जिंदगी में एक बार तो  बगावत करके देखना  तूम्हें  जिंदगी मिल जायेगी। डॉ. अस्मिता
In my eyes :      रिश्ते    हर कोई अगर        अपने रिश्ते  के बारे में....  लिखने लगे         तो रिश्ते  नहीं रहेंगे.......  डॉ. अस्मिता  

मटेरियल

क्या तुम्हारी  देह मटेरियल मात्र हैं क्या तुम्हारा  हसना   रोना  भी मटेरियल बना है। क्या तुम्हारे  सपने नही है।  क्या तुम्हारे पास  अपने विचार नहीं है।  क्या तुमने  सोचना बंद किया है। क्या तुम अभी  दुनिया के तुम्हारे प्रति  दृष्टिकोन पर विश्वास  करणे लगी हो  दुनिया तुम्ह बुद्धीहीन मानती है और तुम भी  बुद्धीहीनता में गर्व मानती हो। तुमें स्वीकारयता  के साथ कुछ भी  बनाया जा सकता है  तुम जाणते हुये भी  अपने स्वार्थ के लिए उसे मानती हो लेकीन एक बात  याद रखना  तुम्हारी पिढीया इससे कमजोर  हो रही है। और इसके लिए  तुम्ह भी उतना ही  जिमदार माना जायेगा  जितना की इस व्यवस्था और  परंपराओ को  इसलिए  निर्णय और रास्ता तुम्हारा है......

उत्पादन

महिलाए कुलर लगाती है और बिस्तर पर लेटकर अपनी बाई टांग को रख देती है अपने सोते पती के पेट पर  श्रम के बाजार में  एक नये श्रम जीवी के उत्पादन की आस में..... - सुधीर जिंदे

मखमली सोफा

महिलाये सुबह उठती है नाहती है  अपने शरीर पर परफूम लगाती है... और चल देती है बाजार  अपने लिए आराम खरीदने  बीच बाजार उन्हें दिखता है... एक खूबसुरत मखमली सोफा गड्डीदार...मुलायम... अपने शरीरसा पा कर खुश हो जाती है.. और खरीद लाती हैं  जैसे मखमली देखकर  उन्हें भी खरिदा गया था कभी...... सुधीर जिंदे

In my eyes : आप और हम

In my eyes : आप और हम : आप और हम आपका पढना परंपरा है। हमारा पढना परिवर्तन है। आपकी लढाई विमर्श है।  हमारी लढाई संघर्ष है। आपका पहनावा अभिलाषा है।  हमारा पहनावा अस्त...

आप और हम

आप और हम आपका पढना परंपरा है। हमारा पढना परिवर्तन है। आपकी लढाई विमर्श है।  हमारी लढाई संघर्ष है। आपका पहनावा अभिलाषा है।  हमारा पहनावा अस्तित्व है। आपका लिखना लेखक बनना है। हमारा लिखना सेवक बनना है। आपकी कलम मनोरंजन करती है। हमारी कलम परिवर्तन करती है। आपका विश्वास नियमों पर है। हमारा विश्वास मुक्ती पर है। डॉ. अस्मिता