Skip to main content

मटेरियल

क्या तुम्हारी
 देह मटेरियल मात्र हैं
क्या तुम्हारा 
हसना 
 रोना 
भी मटेरियल बना है।
क्या तुम्हारे 
सपने नही है।
 क्या तुम्हारे पास 
अपने विचार नहीं है।
 क्या तुमने 
सोचना बंद किया है।
क्या तुम अभी 
दुनिया के तुम्हारे प्रति
 दृष्टिकोन पर विश्वास 
करणे लगी हो 
दुनिया तुम्ह बुद्धीहीन मानती है
और तुम भी 
बुद्धीहीनता में गर्व मानती हो।
तुमें स्वीकारयता 
के साथ कुछ भी
 बनाया जा सकता है 
तुम जाणते हुये भी
 अपने स्वार्थ के लिए उसे मानती हो
लेकीन एक बात 
याद रखना
 तुम्हारी पिढीया इससे कमजोर
 हो रही है।
और इसके लिए 
तुम्ह भी उतना ही 
जिमदार माना जायेगा 
जितना की इस व्यवस्था और 
परंपराओ को 
इसलिए 
निर्णय और रास्ता तुम्हारा है......




Comments

Popular posts from this blog

किताब

ज्ञान तुम हो विज्ञान तुम हो        तुम्हारे ही भीतर है अनुभव और मनोरंजन  का सहअस्तित्व         तुम्हारे गर्भ से ही  जन्म होता है मेरी बौद्धिकता का मेरी बौद्धिकता   मेरा अस्तित्व है         हे......किताब मेरे अस्तित्व के  निर्माता तुम हो......  डॉ. अस्मिता 

आप और हम

आप और हम आपका पढना परंपरा है। हमारा पढना परिवर्तन है। आपकी लढाई विमर्श है।  हमारी लढाई संघर्ष है। आपका पहनावा अभिलाषा है।  हमारा पहनावा अस्तित्व है। आपका लिखना लेखक बनना है। हमारा लिखना सेवक बनना है। आपकी कलम मनोरंजन करती है। हमारी कलम परिवर्तन करती है। आपका विश्वास नियमों पर है। हमारा विश्वास मुक्ती पर है। डॉ. अस्मिता 

दिशा

आसान नही होता हवा के विरुद्ध बहना.... हवा के साथ तो कचरा भी बह जाता है.....