जिस दिन तुम्हें लगे
जीवन में कुछ खास नहीं बचा
जीवन उदास लगे
जीवन का रस कम हो जाये ......
उसी दिन तुम
अपनी मन की आवाज सूनना
और अपनी पसंद का
जीवन जीने लगना
यही सही समय है ।
अपने आपको जीने का......
यही समय है।
अपने आप को मुक्ति दिलाने का .....
बरसों से जो तुमने
अपनी आत्मा को सुन्न करके रखा है
बरसों से जो तुमने
अपनी आवाज़ को दबाया है,।
बरसों से जो तुमने
अपने शब्दों को नकली बनाकर रखा है
जिंदगी में एक बार तो
बगावत करके देखना
तूम्हें जिंदगी मिल जायेगी।
डॉ. अस्मिता
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