Skip to main content

Posts

सोना और पितल

"पितल कितना भी चमकता हो सोना नहीं बनता।  और  सोना कितना ही निस्तेज हो पितल नहीं बनता। इसलिए पितल की चमक से ज्यादा सोने की निस्तेजता काम की है। क्योंकि सोने की निस्तेजता की किंमत  पितल की चमक से ऊंची है।"                                डॉ. अस्मिता

मनुष्य की गरिमा

मनुष्य की गरिमा उसका मौन हैं। बुद्ध मौन है महावीर मौन है मौन मनुष्य के शक्तिशाली होने का प्रमाण है। मौन आंतरिक ऊर्जा की अभिव्यक्ती है। मौन आंतरिक परिपक्वता की अभिव्यक्ती है। मौन मनुष्य की जागृत अवस्था है। मौन शांत महासागर की तरह है। मौन अपने आप में एक महासागर है। मौन एक लंबी आंतरिक यात्रा का परिणाम है। मौन विरक्ती का स्वभाव है। मौन अहं से मुक्ति है। मौन अस्तित्व का स्विकार्य भाव है। डॉ. अस्मिता

जीवन

जीवन हे जेवण आहे. कारण जेवण बंद होते तेव्हा  जीवन संपते जीवन लहान मुलां सारखे असावे जेवण, झोप आणि खेळणे मोठे झाल्यावर फक्त  खेळण्याच्या जागी  काम जोडले जावे  बाकी जीवन तेवढेच निशचिंत असावे.

कुछ महिलाएँ

कुछ महिलाएँ होती है  आझाद उत्सव मनाती है अपने होने का  जिंदा करती है  अपनी बौद्धिकता से  मानवता को  और  देती है चुनौती सामाजिक बुद्धिहीनता को क्योंकि सामाजिक बुद्धिहीनता  बांधती है बांध  बुद्धि पर  और रोक देती है मानवता की उठती लहरों को ऐसी महिलाएँ  कभी  कही जाती हैं  परकटी, घर तोडनेवाली, निस्तेज और यौवनहीन........... डॉ. अस्मिता  

चुनाव

चुनाव हो अपनी मानसिकता के  समाज का या समाज हो अपनी मानसिकता का दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू है। सही चुनाव तो सही मानसिकता का है। जीसे हम बनाते हैं  क्योंकि.......  मानसिक सिंचाई की गुणवत्ता  ही  जीवित रखती है हमारी अस्मिता को........ डॉ. अस्मिता

सिमोन और सार्त्र

सिमोन की बौध्दिकता  उसकी अपनी थी।   सिमोन की सोच  उसकी अपनी थी।  सिमोन की क्रांतिकारीता  उसकी अपनी थी। जीवन की निर्णायकता भी  उसकी अपनी थी। लेकिन....... सिमोन को सार्त्र की साथ थी।  सार्त्र भी सिमोन जैसा ही साथी चाहता होगा। क्योंकि...... एक दार्शनिक व्यक्ति  एक दार्शनिक मानस चाहता है,  जो सिमोन के पास था। इसलिए........ सवाल सहअस्तित्व का है। सिमोन और सार्त्र एक दुसरे का सहअस्तित्व चाहते थे। और..... उस सहअस्तित्व की स्वीकार्यता भी थी।  लेकिन....... नासमझ लोगों ने  कभी सिमोन को सार्त्र  का स्पर्धक माना। तो...... कभी सार्त्र को सिमोन का........  कभी सिमोन को सार्त्र  से कम समझा। तो...... कभी सार्त्र को सिमोन से..... सवाल तो बस साथ होने का है। क्योंकि....... सार्त्र से ही सिमोन बनती है। और ..... सिमोन से ही सार्त्र बनता है। डॉ. अस्मिता