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दिशा

आसान नही होता हवा के विरुद्ध बहना.... हवा के साथ तो कचरा भी बह जाता है.....
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किताब

ज्ञान तुम हो विज्ञान तुम हो        तुम्हारे ही भीतर है अनुभव और मनोरंजन  का सहअस्तित्व         तुम्हारे गर्भ से ही  जन्म होता है मेरी बौद्धिकता का मेरी बौद्धिकता   मेरा अस्तित्व है         हे......किताब मेरे अस्तित्व के  निर्माता तुम हो......  डॉ. अस्मिता 

मानवाच्या नैतिक विकसाकरिता संताचे विचार प्रासंगिक

भारतीय संस्कृती मध्ये संतांना ज्ञान, त्याग व भक्तीचे प्रतीक मानले जाते. मनुष्याला स्वार्थ, तृष्णा, अहंकार शिकवावे लागत नाही, हे सर्व विकार त्याच्या मध्ये नैसर्गिक रित्या असते परंतु  निस्वार्थ, विरक्ती व सहजभाव हे व्यक्ती मध्ये संस्कारातून तयार होतात हे संस्कार संतांच्या विचारतून  येतात.  ज्ञान फार कमी लोकांना स्वत:कडे आकृष्ट करते, ज्ञान घेण्याची जिज्ञासा कमी लोकांमध्ये असते ती जिज्ञासा संतांच्या विचारतून तयार करता येते. मनुष्यासाठी असलेली सर्वात कठिन गोष्ट म्हणजे त्याग होय. त्याग ही एक विस्तृत संकल्पना आहे. अनेकदा व्यक्तीला व्यक्तिचा इच्छा नसताना त्याग करावा लागतो, घराचा, वस्तूंचा, इच्छेचा या व अशा अनेक गोष्टिंचा त्याग करुन व्यक्ती विरक्तिकडे मार्गक्रमण करतो व त्यातूनच भक्तिचा मार्ग मोकळा होतो. याला आत्मिक चिंतन, आत्मिक प्रवास म्हणू शकतो या मार्गा मध्ये व्यक्ती स्व सुखा पेक्षा पर सुखाला स्व अनुभूती मधुन पर अनुभुतिला जाणण्याचा प्रयत्न करतो. अर्थात तो संतात्वाकडे मार्गक्रमण करतो.  या संतत्वाला साध्य करण्याकरिता निर्गुण निराकार ईश्वराच्या शक्तीची व त्याच्या प्रेरणेची गर...

                                                                          वो अलग है  शहर के पास एक गाँव था, गाँव के बाहर एक बड़ी सी नदिया थी।   एक लड़की रहती थी                                                            

सोना और पितल

"पितल कितना भी चमकता हो सोना नहीं बनता।  और  सोना कितना ही निस्तेज हो पितल नहीं बनता। इसलिए पितल की चमक से ज्यादा सोने की निस्तेजता काम की है। क्योंकि सोने की निस्तेजता की किंमत  पितल की चमक से ऊंची है।"                                डॉ. अस्मिता

मनुष्य की गरिमा

मनुष्य की गरिमा उसका मौन हैं। बुद्ध मौन है महावीर मौन है मौन मनुष्य के शक्तिशाली होने का प्रमाण है। मौन आंतरिक ऊर्जा की अभिव्यक्ती है। मौन आंतरिक परिपक्वता की अभिव्यक्ती है। मौन मनुष्य की जागृत अवस्था है। मौन शांत महासागर की तरह है। मौन अपने आप में एक महासागर है। मौन एक लंबी आंतरिक यात्रा का परिणाम है। मौन विरक्ती का स्वभाव है। मौन अहं से मुक्ति है। मौन अस्तित्व का स्विकार्य भाव है। डॉ. अस्मिता