ज्ञान तुम हो विज्ञान तुम हो तुम्हारे ही भीतर है अनुभव और मनोरंजन का सहअस्तित्व तुम्हारे गर्भ से ही जन्म होता है मेरी बौद्धिकता का मेरी बौद्धिकता मेरा अस्तित्व है हे......किताब मेरे अस्तित्व के निर्माता तुम हो...... डॉ. अस्मिता
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