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शांति क्या है

शांति क्या है (what is peace)
शहाणपण + अंति = शांति 
         शांती मनुष्य मन की एक ऐसी अवस्था है, जीसमे मनुष्य मन सभी प्रकार की आसक्ती और तृष्णाओ से विरक्त होता है। शांति मनुष्य मन की मध्यस्थ अवस्था है, जिसमें मनुष्य सुख और दुःख इससे परे होता है। मनुष्य न सुख की स्थिति में जाता है न दुःख की स्थिती में, वह कोई भी स्थिती हो केवल शांती को महसुस करता है या कर पाता है। शांती का मतलब मन या चित्त की स्थिर अवस्था है। मन की इस अवस्था को पाने के लिए ही सभी प्रकार के धर्म, आध्यात्मिक ज्ञान और ध्यान साधनाओं का विकास हुआ है।मनुष्य मन की इस अवस्था को साध ले तो उसके जीवन से सुख और दुःख का विभाजन कम हो जाता है या नष्ट हो जाता हैं। 
          मनुष्य हमेशा इसी सोच में रहता हैं कि उसे दुःख से मुक्ति मिले लेकिन अगर मनुष्य जीवन है तो दुःख का अस्तित्व भी है। मनुष्य जब इस धरती पर जन्म लेता है और जब वह रोता है तभी उसे जीवित समझा जाता है, डॉक्टर यह नही कहते की हसों, तुम इस धरती पर आये हो बलकि बचचे को रुलाने का प्रयास करते हैं। मनुष्य जन्म ही दुःख के साथ है इसलिए जब वह दुःख की पिडा को सहता/तीऔर समझता/ती है तभी वह मनुष्य जीवन को सार्थक और मूल्यवान बनाता/ती है। जीवन में दुःख की इस तरह की उपस्थिती को देखते हुए ही सभी महामानवो ने दुःख के स्विकार्यता की बात की है। दुःख की स्विकार्यता ही दुःख से मुक्ती हैं। दुःख से लढणा मूढता है। 
      जब मनुष्य दुःख को स्विकार करता है तो उसे दुःख से लढणे की ताकद मिलती है। वह दुःख का एक कोना रखते हुए भी जीवन के बाकी अन्य कोनो को जीना सिख जाता है। जीवन में मनुष्य सुख को जैसे स्विकार करके जी लेता है वैसे दुःख को स्विकार नहीं करता। जब मनुष्य दुःख को स्विकार करना सीख जाता है तो अपने आप शांती को प्राप्त होता है।
           शहाणपण + अंति = शांति 
अर्थात मनुष्य जीवन के सभी अनुभवो से सिखता समझता है और अंत में वह इस निष्कर्ष तक पहूंच जाता हैं कि जीवन का परम लक्ष्य शांति ही है।

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